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हलवा सेरेमनी

 संवैधानिक संस्थाएं संविधान से संचालित होती है। देश चलाने वाले अधिकारी यूपीएससी से चयनित होकर आते हैं। यूपीएससी अपनी भर्तियां संविधान में दिए आरक्षण के अनुरूप करती है।  अधिकारी का चयन और नेता का चुनाव हो जाने के बाद वह किसी जाति विशेष का नहीं रह जाता। उसे संविधान के अनुरूप काम करना होता है, ऐसे में बजट की हलवा सेरेमनी में अफसरों को जाति से पहचाना जाना कितना उचित है? सोशल मीडिया पर एक होती है ट्रोल सेना। ट्रोलिंग में कई बार नैरेटिव गढे जाते हैं, लेकिन कांग्रेस के राजकुमार का सनातन विरोध जग जाहिर है। हाल ही में उन्होंने संसद में कहा कि हिंदुत्व वाले हिंसक है। नेता प्रतिपक्ष के रूप में सोमवार को बजट पर संसद में बोलते हुए उन्होंने एक तस्वीर लहराते हुए पूछा कि यह हलवा किसमे बंटा, हलवा बनाता कौन है? चीन से नजदीकी रखने वाले और टुकड़े - टुकड़े गेंग के सरपरस्त बने लोग यह भूल जाते हैं कि अधिकारियों का चयन यूपीएससी करती है और मोदी के 10 व अटल जी के 5 साल निकाल दें तो बाकी राज तो कांग्रेस का ही रहा है। संवैधानिक संस्थाओं और उनके रीवाजों पर अंगुली उठाने पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने श...

राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़ा

 1999-2000 की बात है। बढ़ती जनसंख्या को लेकर मैंने एक लेख लिखा था -"मानवाधिकार से बढ़कर जीवनाधिकार का मामला"। तब मैं एनजीओ सेक्टर से जुङा हुआ था और सर्वोदय की युवा विंग राष्ट्रीय युवा संगठन का राजस्थान प्रदेश संयोजक था। जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय के मुख पत्र "नई आजादी " ने लेख को छापा। उस लेख ने मुझे युवा गांधीवादी विचारकों की श्रेणी में ला दिया था। यह बात अलग है कि लेख लेखन से पूर्व ही एक पुत्र और एक पुत्री के जन्म के बाद मेरी पत्नी ने बच्चाबंदी का आपरेशन करा लिया था। लेख में मैंने जनाधिक्य का पक्ष लेते हुए लिखा था कि कैसा समय आ गया है कि हम अर्थव्यवस्था के एक मजबूत अंग श्रम-मानव को समस्या समझ बैठे हैं। यह वो समय था जब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार की अनिवार्यता को लेकर डंकल ड्राफ्ट पास हो गया था। विश्व व्यापार खुले करने को लेकर यूएनओ मुहिम छेङे हुए था। तब हम वैश्विक व्यापार के खिलाफ में थे। आज 25 वर्ष बाद हमने बहुत कुछ सीखा है। ग्लोबलाइजेशन व खुलेपन से आई खुशहाली हम परंपरागत तरीके से 65 वर्षों तक तो ला नहीं पाए। पर व्यापक वैश्विक परिवर्तन ...

ठाकुर का कुआ

 मकराना से कुचामन वाया जूसरी जाते हैं तो कुचामन से पहले गढनुमा कई इमारतें आती हैं। ये इमारतें ठाकुरों की नहीं है। कुचामन मार्केट में आटोमोबाइल सेक्टर पर भी ठाकुर नहीं है। यहां चुनाव होने के बाद से एमएलए-एमपी भी ठाकुर नहीं है। यहां पर्वतों पर बना किला भी ठाकुरों का नहीं रहा। नब्बे के दशक से उदारीकरण की शुरुआत के बाद लोगों के जीवन में भारी बदलाव आया है। सामान्य ढाणी में ब्याह -शादी के अवसर पर महादेव लिखी हजार पांच सौ गाङियां तो मिल ही जाएगी। 48 में देश आजाद हुआ, 77 साल में कई बदलाव आए हैं। लोकशाही मजबूत हुई है। 77 साल बाद भी एक पोस्ट ग्रेजुएट कद्दावर कांग्रेस नेता विधानसभा में बजट को ठाकुर का कुआ कह रहा है। बजट राजघरानों से जुङी व जनता द्वारा निर्वाचित एक महिला ने पढा था। वही महिला जिसके पिता को कांग्रेस ने जयपुर से लोकसभा का टिकट दिया था। जिस कांग्रेस में हरीश चौधरी पंजाब के प्रभारी रहे, उसी कांग्रेस में अलवर राजघराने से जुड़े भंवर जितेंद्र सिंह मजबूत किरदार निभाते हैं। दिग्विजय सिंह कांग्रेस को गाइड करते हैं। जोधपुर राजघराने से जुङी चंद्रेश कुमारी केन्द्र में मंत्री रही हैं। कोटा र...

लोकसभा चुनाव परिणाम 2024

 “सदा न संग सहेलियाँ, सदा न राजा देश।  सदा न जुग में जीवणा, सदा न काला केश। सदा न फूलै केतकी, सदा न सावन होय। सदा न विपदा रह सके, सदा न सुख भी होय। सदा न मौज बसन्त री, सदा न ग्रीष्म भाण। सदा न जोवन थिर रहे, सदा न संपत माण। सदा न काहू की रही, गल प्रीतम की बांह। ढ़लते ढ़लते ढ़ल गई, तरवर की सी छाँह।“ लेकिन राजनीति में हमेशा स्थायित्व की उम्मीद की जाती है। दस सालों में बेदाग छवि, 370 निरस्तिकरण, कोरोना वेक्सीनेसन, मन्दिर प्राण-प्रतिष्ठा, बढती रेल सुविधाएं, बढता आयुद्ध निर्यात, सेना को बढ़ते हथियार, बढी हुई जीडीपी, ऊंचाइयों पर शेयर मार्केट और ब्रांड मोदी ऐसे फेक्टर थे जो फिर से मोदी सरकार की उम्मीद की जा रही थी।  लेकिन भाजपा का रथ 240 पर अटक गया। अब 33 की जरूरत। हालांकि एनडीए 292 पर, पर अब फ्री हैंड कहां? अब गठबंधन सरकार होगी और उसका दवाब होगा। हो सकता है वन नेशन वन इलेक्शन, यूसीसी सहित कई कोर मुद्दों को स्थगित करना पङे।  जीत के कम अंतर को भाजपा बङी बारिकी से विश्लेषण करेगी। नजर 29 पर रखेगी। हो सकता है भाजपा यूपी, महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा पर खास फोकस करेगी। इसलिए राजस...

लोकसभा चुनाव 24

 अपनी दिनचर्या के तहत 07.30 बजे छत पर जब चिड़िया को चुग्गा डाल रहा था तो नीचे खङे 80 वर्षीय बुजुर्ग पङौसी ने बताया कि वो वोट कर आ गए हैं।  बताया कि पहला वोट उन्हीं का था। मतपेटी को हाथ जोड़कर उन्होंने बटन दबाया। यह हमारी आस्था है, विश्वास है और श्रद्धा है। नागौर में वोट इस बार राम मंदिर को हुआ है। लोगों ने वोट नहीं डाला, रामजी को भेंट अर्पित की है। वोट करने के बाद मतदाता अपने को हल्का महसूस कर रहे थे। शाम छः बजे बाद युवाओं के एक समूह में जीत की बधाइयां शेयर की जा रही थी। यह भी एक श्रृद्धा और विश्वास है। सुबह से ही सुस्त रही रफ्तार ने यह अंदेशा दे दिया था कि वोट कास्टिंग कम ही रहेगी। शाम को जारी आंकड़ों ने बता दिया कि 54 से 60 के बीच विभिन्न विधानसभाओं में मतदान हुआ। कम मतदान को लेकर विश्लेषक अंदाजे लगाने लगे।  नागौर को लेकर हमारा अंदाजा है कि आस्था और श्रद्धा की जीत होगी। जीत भी अच्छे खासे अंतराल से होगी। सवाल जब श्रद्धा का आता है तो तमाम शिकायतें बेमानी हो जाती है कि वो जाट है, वो कांग्रेस बेकग्राऊंड से है, इसी एक परिवार का ठेका है क्या, चुनाव प्रचार में मेरी पूछ नहीं हु...

चुनावी मुद्दे

 हमारे खाते सीज किए जा रहे हैं, हमारे नेताओं पर ईडी कार्रवाई कर रही है, ये संविधान बदल देंगे, धमका कर इलेक्ट्रोल बोंड के माध्यम से चंदा ले रहे है!! विपक्ष के ये मुद्दे हैं।  कानून का हम सम्मान करेंगे नहीं, समय पर टेक्स रिटर्न दाखिल करेंगे नहीं और विभाग कार्रवाई करेगा तो हम चिल्लाएंगे कि देखो हमारे पर कार्रवाई हो रही है। देश में कानून का राज है, तुम कानून से ऊपर थोङे ही हो। यदि गलत है तो कोर्ट है ना! तुम सत्ता में थे तो करोङों की सम्पत्ति बनाई। लेकिन कहीं छेद रख दिए तो ईडी को मौका मिल जाता है। सब एक नंबर में रहे तो ईडी क्या करेगी, लेकिन गलतियां तुम्हारी और रोओ भी तुम ही। भुगतते रहो। संविधान बदल देंगे। सत्ता में थे तो तुमने भी नब्बे से ऊपर संशोधन किए थे। जहां संशोधन की जरूरत है, दो तिहाई बहुमत से संशोधन करना ही चाहिए। संसद का काम ही कानून बनाना है। जो दल सत्ता में है, उसे चंदा मिलेगा ही। राजनैतिक पार्टियों कोई कमाने थोङे ही जाती है। चंदा तो तृणमूल को भी मिला है, वीआरएस को भी मिला है। सभी को मिला है। और तरीके से दिया चंदा वैध है चाहे ईडी के डर से ही क्यूं न दिया हो। फिर मुद्दे क्...

होली की शुभकामनाएं

 बसंत और ग्रीष्म ऋतु की संधि काल में आया होली का पर्व आह्लाद का, आनंद का और मस्ती का त्योहार है।  भीतर के कुत्सित विकारों को गायन, वादन और नृतन से जब हम बाहर प्रकट करते हैं तो जीवन में रंग निखर आते हैं। हमारी सनातन परंपरा में यह समरसता का त्योहार है। मनोवेग, मनोविकार और मानसी रोगों को शमन करने का यह अध्यात्मिक उपहार है। सभी ईष्ट मित्रों एवं देवतुल्य मतदाताओं को इस रंग भरे बासंती पर्व की उल्लास व आनंद भरी शुभकामनाएं, अभिनंदन एवं राम राम। त्योहार लोकतंत्र के पर्व के बीच आया है। बङी कशमकश के बाद कल रात कांग्रेस ने नागौर गठबंधन में छोङा, अभी बांसवाड़ा और होल्ड पर कर रखा है। नागौर में जाटों के बाद राजपूत, मेघवाल, माली, मुसलमान, ब्राह्मण - बणियों का लगभग बराबर धङा। परबतसर और लाडनूं में राजपूत प्रत्याशियों की हार ने राजपूतों का रुख जाट विरोधी है। हो सकता है इस चुनाव में निर्दलीय राजपूत भी मैदान में आ जाए। अशोक गहलोत की माली समाज में अब भी सुनी जाती है, कोई शक नहीं कि वे हनुमान के लिए इशारा जरुर करेंगे। गठबंधन होने के कारण हाथ को देवता मानने वाले इस बार जरूर संकट में रहेंगे। हो सकता ह...