चुनाव बाद के आकलन और एक्जिट पोल के मुताबिक ही हुआ लेकिन यह मकराना के हित में नहीं हुआ। हालांकि पिछली बार भी विधायक सरकार के विरोधी था पर साहब ने मकराना का विशेष ख्याल रखा।
हालांकि पार्टियों के होमवर्क में कहीं कमी नहीं रखी। पिछली बार जीत के अंतर, प्रफोर्मेंस और बढ़ती उम्र को देखते हुए रुपाराम को नहीं दोहराया जाना था, ऐसे में प्रकाश व भींचर में से भींचर को इस लिए चुना गया कि यह एससी के वोट लाएगा लेकिन भींचर अपने रूठे साथियों को मना नहीं सके। इसके उलट जाकिर हुसैन ने हाथ पोला रखा और अल्पसंख्यक में भारी विरोध के बावजूद जीत हासिल की।
अब एक बात तय है कि जाटों में दो फाङ स्थाई हो गई है। वहीं जाकिर हुसैन ने भी जीत की स्थिति के बावजूद निलंबन की कार्रवाई कर 4 परिवारों को स्थाई रूप से नाराज़ कर लिया है।
सरकार की कङी से कङी नहीं मिलने से शहर की सेहत पर प्रभाव पङेगा। ऐसे में हम सामाजिक कार्यकर्ताओं का दायित्व बढ़ेगा। चिंता नहीं करें, जैसे हैं हाजिर रहेंगे। पूरी पारदर्शिता व शिद्दता से काम करेंगे। आपके बीच रहने का भी प्रयास करेंगे।
उम्मीद करते हैं इस चुनाव ने आपको बहुत सिखाया होगा। आप भूलें नहीं, इस लिए यह ब्लॉग शुरू किया गया है। हर बात स्थाई रूप से सेव रहेगी।
मैं तुम को आवाज दूं, तुम मुझको आवाज दो....
मिशन दिल्ली फतह
किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि में पंजाब में चुनाव हुए। दिल्ली की तर्ज पर पंजाब में भी फ्री की रेवङियों का पिटारा खोला गया। तो किसान, माइनोरिटी एवं दलित वोट आप को मिले और पंजाब में आप की सरकार बनी। चूंकि हरियाणा भी दिल्ली और पंजाब से जुङा हुआ और यहां भी किसान तो आप ने यहां भी सत्ता के लिए सपना पाला। हरियाणा में दो टर्म से लगातार भाजपा थी जिससे एंटी इंकम्बेक्सी थी तो कांग्रेस को पूरा यकीन था कि वह हरियाणा में वापसी कर सकती है और युवराज के खाते में एक उपलब्धि दिखा सकती है पर घाघ केजरीवाल ने सारे पर पानी फेर दिया। पंजाब जीत से केजरीवाल उत्साहित था तो लोकसभा में अच्छे प्रदर्शन से कांग्रेस। दरअसल लोकसभा चुनाव में इंडी गठबंधन का सबसे ज्यादा फायदा कांग्रेस को मिला ऐसे में दिल्ली आंदोलनों का लाभ केजरीवाल कांग्रेस को देना नहीं चाहते थे और नूरा कुश्ती में हरियाणा में भाजपा तीसरी बार काबिज हो गई। हरियाणा की वापसी ने मूल ओबीसी की बांछे खिला दी। पूरे देश का मूल ओबीसी आज भाजपा के पक्ष में खङा है। हरियाणा हार ने कांग्रेस को बहुत गम दिए। शाहजादे की पैदल यात्रा का जादू उतर गया। झारखंड में जीत नही...
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