कल जाकिर हुसैन के साहब के विजई जुलूस के मकराना में पहुंचने पर उनके द्वारा दिया गया भाषण संबल प्रदान करने वाला है। विधायक महोदय ने कहा कि वह आपके हर दुख सुख में साथ रहने का प्रयास करेंगे तथा हक व अधिकार की लड़ाई सड़क व सदन में जनता के हित में करते रहेंगे। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि वे हर वक्त जनता के बीच मौजूद रहेंगे।
भाजपा से टिकट के एक और दावेदार है प्रकाश भाकर ने भी आज सुबह मुझे विश्वास दिलाया कि शहर हित में वे हमेशा अपना कंधा से कंधा मिलाकर खड़े रहने के लिए तैयार हैं। उम्मीद करते हैं की इस चुनाव में द्वितीय व तृतीय स्थान रहे प्रत्याशी भी शहर हित में राजनीति से ऊपर उठकर जनता के बीच रहने का प्रयास करेंगे।
हमारा एकमात्र उद्देश्य यही है कि सभी अपने हक व अधिकारों की प्राप्ति के लिए कोई अपने को अकेला महसूस नहीं करें इसलिए हम 5 साल तक राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों से सार्थक संवाद बनाए रखेंगे व यथा संभव राहत लेने का प्रयास करेंगे।
राजनीति अब इस मोड़ पर आ गई है कि हर वक्त जनता के बीच रहना जरूरी हो गया है। हमारा प्रयास रहेगा कि मकराना में भी हम ऐसी परिस्थितियों पैदा करें ताकि चुनाव लड़ने के उचित उम्मीदवार अभी से हमारे बीच रहे व हमारे समस्याओं के समाधान में हमारे साथ मिलकर संघर्ष करें। सार्थक लोकतंत्र सिर्फ चुनाव तक ही नहीं है। चुनाव बाद अपने हक व अधिकारों की प्राप्ति के लिए संवाद, संघर्ष और संगठन करना भी है। सभी साथियों के सक्रिय सहयोग की उम्मीद की जाती है।
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मिशन दिल्ली फतह
किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि में पंजाब में चुनाव हुए। दिल्ली की तर्ज पर पंजाब में भी फ्री की रेवङियों का पिटारा खोला गया। तो किसान, माइनोरिटी एवं दलित वोट आप को मिले और पंजाब में आप की सरकार बनी। चूंकि हरियाणा भी दिल्ली और पंजाब से जुङा हुआ और यहां भी किसान तो आप ने यहां भी सत्ता के लिए सपना पाला। हरियाणा में दो टर्म से लगातार भाजपा थी जिससे एंटी इंकम्बेक्सी थी तो कांग्रेस को पूरा यकीन था कि वह हरियाणा में वापसी कर सकती है और युवराज के खाते में एक उपलब्धि दिखा सकती है पर घाघ केजरीवाल ने सारे पर पानी फेर दिया। पंजाब जीत से केजरीवाल उत्साहित था तो लोकसभा में अच्छे प्रदर्शन से कांग्रेस। दरअसल लोकसभा चुनाव में इंडी गठबंधन का सबसे ज्यादा फायदा कांग्रेस को मिला ऐसे में दिल्ली आंदोलनों का लाभ केजरीवाल कांग्रेस को देना नहीं चाहते थे और नूरा कुश्ती में हरियाणा में भाजपा तीसरी बार काबिज हो गई। हरियाणा की वापसी ने मूल ओबीसी की बांछे खिला दी। पूरे देश का मूल ओबीसी आज भाजपा के पक्ष में खङा है। हरियाणा हार ने कांग्रेस को बहुत गम दिए। शाहजादे की पैदल यात्रा का जादू उतर गया। झारखंड में जीत नही...
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